दर्दे दास्ताँ

आज यूँही मेरे लबों पर दर्दे दास्ताँ चली आई
कुछ न रहा शेष अब, जिन्दगी जहाँ चली आई।

कहाँ से शुरू करू, टुकड़ो में मेरी कहानी है
गम है रंजिश है, बेपनाह इश्क की रवानी है।
उसको मैंने कब देखा, याद नहीं तब देखा
दीदार ऐसे हुवा, जैसे वह हो मेरी जीवन रेखा।
दिल का जहाँ ठिकाना था, वह वहाँ चली आई।

पर उसे अपनाने में अपनों ने अड़चन डाली है
दुर्भाग्य से वह मेरे दो सगे भाईयों की साली है।।
मेरी मोहब्बत मुझे मिला दे, जमाने का दस्तूर नहीं
उनकी बहन मेरी हो जाये, भाभियों को मंजूर नहीं।।
शून्य में जी रहा मै, किस्मत मेरी कहाँ चली आई।

रिश्तों की मर्यादा तोडूँ, मुझमे ऐसा दमखम नहीं
मै भले वफ़ा कर न सका, पर वह भी बेवफा नहीं।।
हम एक दूजे के होकर भी, एक दूजे के हो न सके
आँखों में आँसू भरा रहा, हम खुलकर रो न सके।।
हमारे गिरते अश्कों पर सब्र की इन्तहां चली आई।

ख्वाब था मेरा, मेरे हाथों में उसका हाथ रहे
गम हो या हो ख़ुशी वो हरदम मेरे साथ रहे।।
उसकी मोहब्बत खातिर जब हम निकल पड़े
हमारे प्यार की राहों में खुद अपने हो गए खड़े।।
कमबख्त बदनसीबी मेरे पीछे वहाँ चली आई।

तन्हा मेरी रातें वीरान दिल की हर महफिल है
अब हमसफ़र है न कोई, न ही कोई मंजिल है।।
यह सांसे ही तो हैं जिनके बदौलत मै जिन्दा हूँ
समाँ में जल जल जाने को बेताब क़ीट पतंगा हूँ।।
हाय मेरी मोहब्बत मुझे लेकर कहाँ चली आई

हम भी अगर चाहे होते, तो भूचाल आ जाता
मान मनौव्वल में इकठ्ठा कायनात आ जाता।।
पर पाक मोहब्बत को तमाशा बना नहीं सकते
अपनों की रुसवाई पर सेज सजा नहीं सकते।।
मुसद्दर देख तेरी जिन्दगी अब यहाँ चली आई।।।

✍सुरेन्द्र नाथ सिंह “कुशक्षत्रप”✍

9 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 12/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/05/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/05/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 12/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/05/2016
  4. sarvajit singh sarvajit singh 12/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/05/2016
  5. Sameer Hazarika 12/05/2016

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