शहर का होकर

शहर का होकर

गाँव में जो हरियाली थी
उसकी खातिर तरस गया
आया था शहर में काम के लिए
शहर का होकर रह गया।
माना मिली शहर में सुविधा
ओर मिला वातावरण दुषित
शहर में इतनी गंदगी फैली
करती इन चारों को प्रदूषित
जल, वायु, ध्वनि और भूमि
जीवन में जहर घोल लिया।
आया था शहर में काम के लिए
शहर का होकर रह गया।
शहर नाम से भी मुझको
होने लगी बस अब घिन्न
याद हैं मुझे अब भी वो दिन
खेतों में घुमते थे जब हम
चारों तरफ हरियाली थी
गम हमें कोई न था ।
आया था शहर में काम के लिए
शहर का होकर रह गया।

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  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/05/2016

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