‘मुस्कुराहट ‘ एक गजल

वो मुस्कुराहट हमारी कहा खो गयी
लाख ढुढा उसे और न मै पा सकी ,
हम चले थे हाथ पकड़ संग उनके • • •
उनकी राहो मे तो राह हमारी खो गयी
वो मुस्कुराहट हमारी कहा खो गयी
लाख ढुढा उसे और न मै पा सकी । ।

देखा था इक ख्वाब बचपन से ही,
कि निभा जायेंगे हम साथ उनके कई • • •
पर निभाते निभाते बचपन खो गई
वो मुस्कुराहट हमारी कहा खो गयी ,
लाख ढुढा उसे और न मै पा सकी । ।

न हम चल सके और न वो चल सके,
ठोकर लगी दिल पर कई,
कभी कदमो मे गहरी चुभन हो गई,
चले हम तो थे पर जहा सो गई • • •
वो मुस्कुराहट हमारी कहा खो गयी
लाख ढुढा उसे और न मै पा सकी । ।

दर्द दिल का हम बता न सके,
मोहब्बत कभी उनसे जता न सके • • •
यु बताते बताते भीड़ कम हो गयी ,
वो मुस्कुराहट हमारी कहा खो गयी,
लाख ढुढा उसे और न मै पा सकी । ।

काजल सोनी

One Response

  1. babucm babucm 12/05/2016

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