तेरी शरण चाहिये

सलोनी सी मूरत , का दरश चाहिये |
भगवन तेरे – दर , का पता चाहिये ||
गाऊँ तेरे – गीत , हर पल सदा मैं ,
मेरी वाणी को ऐसा , सुर चाहिये ||
न भटकूँ जगत में, मैं औरों के पीछे ,
मुझ अकिंचन को तेरी शरण चाहिये ||
सूर ,तुलसी थे , जिनके दीवाने बने ,
पंकज उन्ही का अनुगमन चाहिये ||
आदेश कुमार पंकज

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/05/2016
    • आदेश कुमार पंकज आदेश कुमार पंकज 11/05/2016
  2. babucm babucm 11/05/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 11/05/2016
  4. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 12/05/2016

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