शायरी3 -तमन्नायें

उनसे मिलने की तमन्नाओं में अभी हम खोये थे कहीं,
के उनकी पायल की झनकार का कुछ शोर-सा उमड़ा,
हमने कहा ज़रा पास! ज़रा पास! और पास!,
और पास आये तो, उन्होंने घूंघट ओड़ लिया;

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