फ़ैज़

पौधे खरीद रही है । मैं बहुत जले-कटे ढंग से याद दिला रहा हूँ, कैसे उसे उनकी देखभाल करनी नहीं आती, कैसे हर बार पाँच- सात दिन बाद पानी देना भूल जाती हो, कैसे हर बार एक पेड़, एक फूल तुम्हारे हाथों तबाह हो जाता है, कैसे यह तबाही तुम्हें उज़ाड देती है, कैसे यह क़त्ल तुम्हें बहुत दिनों तक गुमसुम रखता है ।
लाहौल विला फिर भी ढेर सारे खरीद ही लेती है कमबख़्त । मैं एक पौधा हाथ में ले कर कहता हूँ चलो प्यारे सू-ए-दार चलें वह कुछ जोर देकर याद करती है– फ़ैज़ ?.

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