१६. हम अपनी दुनिया को………………|ग़ज़ल| “मनोज कुमार”

हम अपनी दुनिया को ही भूल गये होते
गर यादें ना साथ देती टूट गये होते……………………………

ना मिलती सोहरत ना ही मशहूर हो पाते
झील से तेरे चक्षुओं में हम डूब गये होते

तुमसे है कितनी महोब्बत कह नही पाते
नींद नही आती ना तुम बिन मर गये होते

गम दुःख रहते दुनिया में वो छू नही पाते
तुम बन आते रहनुमा दिल छोड़ गये होते

कितने आते तूफां लेकिन तोड़ नही पाते
प्यार से पक्की नीव दिल की कर गये होते

जब जाना था छोड़ ना दीवाना हमें बनाते
जब करते आलिंगन रूह मिल गये होते

ये जिस्म तो रहता लेकिन इसमें जाँ नही होती
प्यार की तन्हा हम तपिश में पिघल गये होते

मंजिल मिल जाती मनोज जो साथ मेरे तुम होते
मिल जाता साहिल जो तुम कस्ती बन गये होते

“मनोज कुमार”

3 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 11/05/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 11/05/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 11/05/2016

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