रहनुमाई – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

रहनुमाई

बहुत जी लिए तेरी रहनुमाई में हम
अब तो पंख फैला कर …………………..
खुले आसमान में
उड़ने का दिल करता है ………………….

शायर : सर्वजीत सिंह
sarvajitg@gmail.com

8 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 12/05/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 12/05/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/05/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 12/05/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/05/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 12/05/2016
  4. Inder Bhole Nath Inder Bhole Nath 12/05/2016

Leave a Reply