आज गावॅ हो या शहर,
नगर या महानगर;
राज मार्ग हो या गली
हर जगह हमे मिल जायेगा ठेलागाडी ;
चारो ओर दौर रही एक से एक शक्तीशाली गाडी
फिर भी अस्तित्व मे है हमारी ये पुरानी ठेलागाडी !

ह्र्र जगह दीख रहा द्बन्गो का दबन्गी
दर्प के साथ आगे आगे चल रहा ;
दरीद्र, निःसहाय, दूर्बल कराह रहा
अपने अस्तित्व को बचाने
ठीक जैसे ठेलागाडी !

कब तक चलेगी दबन्गो की दबन्गी
जिस दिन जागेगा दरीद्र,निःसहायो मे आक्रोश
वो बन जायेगा भयन्कर
उस दिन होगा दबन्गो का शेष !!

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