‘दर्द ‘

फितरत नही थी मेरी रुठ जाने की • • • •
थी कोशिश बस तुम्हे मनाने की • • • •
तुमने इश्क की इम्तिहान ली यु इस कदर ,
वरना परवाह नही थी मुझे इस जमाने की • • • •

इक बार कहा होता • • •
बड़ी जल्दी थी तुम्हे हमारे जाने की ,
हम तो खुशिया चुरा रहे थे तुम्हारी खातिर • • •
वरना तमन्ना नही थी हमे कुछ भी पाने की • • • •

काजल सोनी

7 Comments

  1. babucm babucm 10/05/2016
  2. Kajalsoni 10/05/2016
  3. Rajeev Gupta RAJEEV GUPTA 10/05/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 10/05/2016
  5. k.d 11/05/2016
  6. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 11/05/2016
  7. Kajalsoni 11/05/2016

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