हम ऐसा क्या कर बैठे

एक सितमगर से दिल लगा बैठे…
हसीन से झूठ पे ऐतबार कर बैठे….

तारे गिनने पे लगा दिया हमको…
हिसाब कमज़ोर था पढ़ने आ बैठे….

हकीम को नब्ज़ क्या दिखाई हमने…
वो नब्ज़ ही हमारी गुम कर बैठे….

वादा उनका वादा ही रहा तो क्या…….
हम अपना बादा ले बैठे…

इस शान से उठी थी पालकी उनकी…
ग़ुरबत अपनी को हम शाबाशी दे बैठे…

सुना था कि उनकी झील सी आँखों में हम बसते हैं…
तैराक थे नहीं…ढूँढ़ने जो निकले तो खुद को ही डुबो बैठे…

पता नहीं क्यूँ कहते हैं सब के “बब्बू” इश्क़ में मर बैठा…
जान जिगर तो उनका था..फिर हम ऐसा क्या कर बैठे…
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/सी.एम.शर्मा (बब्बू)

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/05/2016
    • C.M. Sharma babucm 10/05/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/05/2016
    • C.M. Sharma babucm 10/05/2016

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