ना समझी

मेरी कलम से________

शिवम् सिहं शिवा

ना समझी

गलतियॉ थी अपनी
ना समझी थी अपनी,
बातें थी अच्छी
पर लगी बुरी,
मेरा दिल लगाना
हो गया अपसाना,
तेरे मेरे दरमियॉ
अब रहा न कुछ,
रह गया अकेला
मैं गोरा कागज ,
न जाने किसने मिटाया
उन चन्द शब्दों को ,
जिसे प्यार कहते हैं |

धन्यवाद

2 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 09/05/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/05/2016

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