“चलो”

हौसलो को करके बुलंद,
अपनी तकदीर का
रोशनी से अंधेरे को मिटाते चलो ।
जख्मो को दे के मरहम ,
वक़्त का साथ निभाते चलो ।

लौट आयेंगे वो खोये फरिश्ते भी ,
जिनके तुम कायल हो,
तुम अगर अपनो का साथ निभाते चलो ।

चलते रहो जब तक मंजिल न मिले,
दुर निकल आओ इन गमो से,
जिदंगी गम मे जिने का नाम नही,
दर्द को भी सिद्ददत से सहलाते चलो ।

हाथो मे इक दुजे का हाथ रखकर,
दिये को दिये से जलाते चलो ।
उम्मीदो भरी गहरी साँसे लो ,
तकदीर का ताला तोड़ ,
तुम गैरो का भी साथ निभाते चलो ।

चलते रहो रुको नही,
घबरा रहे गर तो घबराते चलो ।
मंजिले करीब आती है चलते रहने से,
न किसी को ठुकराओ सभी को अपनाते चलो ।।

काजल सोनी

3 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 09/05/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/05/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/05/2016

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