माँ(कुण्डलिया)

माँ (कुण्डलिया)

माँ है नित्य निवेशिका , ममता समता नेह ।
कल्पवृक्ष की छाँव है ,तनिक नही सन्देह ।
तनिक नही सन्देह ,गेह को स्वर्ग बनाती ।
करके दुःख प्रतिकार ,सुखों की सेज सजाती ।
राम’करे प्रणाम, चरण बिच स्वर्ग क्षमा है ।
करे जगत निर्माण ,निराली ऐसी माँ है ।

©राम केश मिश्र

3 Comments

  1. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 08/05/2016
  2. C.M. Sharma babucm 09/05/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/05/2016

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