बहुत याद आती है माँ……

बहुत याद आती है माँ

भूख – पयास की तडप उठी हो
या अकेलेपन का हो अहसास
गर किसी कठिनाई से हो सामना
और व्यथित मन हो उठता उदास
तब सचमुच बहुत याद आती हो माँ ।।

अज्ञानता मे अगर हो जाये कोई त्रुटी
उस पर अपने ही करने लगे उपहास
भावनाए होने लगती है तब आहत
और हृदय को हो पीडा का आभास
तब सचमुच बहुत याद आती हो माँ ।।

कभी दुख की घडी से हो सामना
या जीवन में आये पल कोई खास
मन चाहे साझा करना हृदय के जज्बात
और उस पल होती नही तुम आस पास
तब सचमुच बहुत याद आती हो माँ ।।

जीवन बोझिल सा लगने लगे
दुनिया मे नही आये कुछ रास
अंधकार से जब जूझ रहे हो
दूर तक नही दिखे जब प्रकाश
तब सचमुच बहुत याद आती हो माँ ।।

आंगन के घोंसले मे चहचहाते चूजे को
जब चिड़ियाँ आकर दाना खिलाती है
याद आ जाता है अपना भी बचपन
बरबस ही आँखे नीर से भर आती है
तब सचमुच बहुत याद आती हो माँ ।।
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डी. के. निवातियॉ

16 Comments

  1. babucm babucm 08/05/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/05/2016
  2. Akash Mishra 08/05/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/05/2016
  3. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 08/05/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/05/2016
  4. Shyam Shyam tiwari 08/05/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/05/2016
  5. shalu verma shalu verma 08/05/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/05/2016
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/05/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/05/2016
  7. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 08/05/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/05/2016
  8. sarvajit singh sarvajit singh 09/05/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 11/05/2016

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