मेरी माँ, मेरा कावा कैलाश

*माँ (ताटंक छंद)*

जीवनदात्री करुणामयि माँ!
तू विश्वास हमारा है।
तेरे पद में काशी-मक्का,
शुचि सुरसरि की धारा है।।

तुम काबा कैलाश तुम्ही हो,
तुम में ईश्वर पाया माँ।
तेरी ममता की छाया ने,
जीवन धन्य बनाया माँ।।1।।

ढाल बनी तू हर संकट में,
दुख में साथ दिया माता!
सुत की खुशियों हेतु हमेशा,
निज सुख त्याग किया माता!

सिर पर हो आशीष तुम्हारा,
चरण-शरण की आशा है।
हर जीवन में तू ही माँ हो,
एक यही अभिलाषा है।।2।।

सुरेन्द्र नाथ सिंह ‘कुशक्षत्रप’

11 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 08/05/2016
      • Pragya jain 26/08/2016
      • Pragya jain 26/08/2016
    • Pragya jain 25/08/2016
    • Pragya jain 25/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 08/05/2016
  3. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 08/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 08/05/2016
  4. babucm babucm 09/05/2016

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