राही रे !

रुक मत, बस चलता चल तू ,
क्यूं डरता है औरों से
जो खुद लगें हैं चलने में,
तेरी हिम्मतों की दाद
ये आशमा देता है ,
अब न रुक बस चलता चल
ओ राही रे बस चलता चल ,

शिवम् सिहं शिवा

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/05/2016
  2. babucm babucm 09/05/2016

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