अब ज़िंदगी संवर जाने दे…

ऐ-वक़्त है गुज़ारिश अब निखर जाने दे
गमों की इन आँधियों को अब गुजर जाने दे
ख्वाहिश सदियों की तुझसे,रखता नहीं है “इंदर”
चन्द लम्हों मे ही सही,अब ज़िंदगी संवर जाने दे…

…इंदर भोले नाथ…
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4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/05/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/05/2016
  3. C.M. Sharma babucm 09/05/2016

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