प्रज्ज्वल और रिद्धि

*बाल कविता(चौपाई छंद)*

प्रज्ज्वल, रिद्धि नाम हमारे।
हम हैं बच्चे मन के न्यारे।।
मम्मी की आँखों के तारे।
पापा को प्राणों से प्यारे।।

मम्मी हमको सुबह जगाती।
ब्रश करवाकर नित नहलाती।
मन पसंद पकवान बनाती।
बड़े प्यार से हमें खिलाती।।

ऑफिस से जब पापा आते।
टॉफी और खिलौने लाते।।
बात-बात पर हमे हँसाते।
घोड़ा बनकर हमे घुमाते।।

होमवर्क मम्मी करवाती।
अच्छी अच्छी बात सिखाती।।
जब हम सोते लोरी गाती।
प्यार बहुत हम पर बरसाती।

पापा रोज हमें टहलाते।
नयी नयी बाते बतलाते।।
कैसे स्वस्थ रहें सिखलाते।
जीने की वह राह दिखाते।।

दादा जी संस्कार सिखाते।
रामायण का पाठ सुनाते।।
दादी परी-लोक ले जातीं।
कथा कहानी गीत सुनाती।।

छुट्टी के दिन धूम मचाते।
खूब खेलते हम हरसाते।।
गुल्ली-डंडा लूडो कैरम।
मिलजुलकर हम खेलें हरदम।।

मम्मी पापा दादी दादा।
सबका जीवन सीधा-सादा।।
इस दुनिया में जब तक ये हैं।
हम बच्चों के बड़े मजे हैं।।
!!!
!!!
✍सुरेन्द्र नाथ सिंह “कुशक्षत्रप”✍

6 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 07/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 07/05/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 07/05/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 07/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 07/05/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/05/2016

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