मन हठीली

एक चाँद चमकीली
बदरी में डूबी,
एक आहट मिटती सी
कानो को छू ली,
एक प्यास बूझी सी
जग कंठो को छिल गई।
एक नैना तरसी
बरस-बरस अधरों में मिल गई ।

एक प्रेम बावली
तुझको हीं खोजे,
मन हठीली,
माने न माने।।

तू ठहरा छलिया,
केवल छल हीं जाने,
इस मूरख मन को
अब कौन संभाले।

उर का स्पंदन
बुझ -बुझ है हारे,
अब कौन बावला,
इस दुख को तारे।।
एक प्रेम बावली
प्रेम को तरसे,
अब कौन बावला
बन बादल बरसे।

. अलका

9 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 07/05/2016
    • ALKA ALKA 07/05/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/05/2016
    • ALKA ALKA 07/05/2016
  3. Jay Kumar 07/05/2016
    • ALKA ALKA 07/05/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 07/05/2016
    • ALKA ALKA 07/05/2016
  5. श्रवण सावन 14/10/2016

Leave a Reply