दोबारा अपने बच्चों के साथ जीतें हैं बचपन।

we enjoy our childhood once again with our kids..

एक बार फिर से हम अपना बचपन जीते हैं।
जब अपने बच्चों के संग हम फिर से बच्चे बनते हैं।
तोतली आवाज़ में जब वो बोले,हम भी तुतलाने लगते हैं।
मीठी मीठी बातों में उनकी हम भी खोने लगते हैं।
उनके साथ कभी खिलौनों के संग हम खेलें।
तो कभी हाथी और कभी घोड़ा बन जाते हैं।
परियों की नित नई कहानी उनको जब सुनाते हैं।
फिर उनके संग सपनों में हम परीलोक पहुँच जाते हैं।
जब पार्क में वो झूला झूले, हम अपनी यादों में खो जाते है।
एक ही पल में हम उनके संग बचपन की सैर कर आते हैं।
जब वो हमसे गुस्सा हो जाएँ, तो झूठमूठ का रोना रोकर फिर से उन्हें मनाते हैं।
तरह तरह की शक्ल बनाकर उनको खूब हँसाते हैं।
एक बार फिर से हम अपना बचपन जीते हैं।
जब अपने बच्चों के संग हम फिर से बच्चा बनते हैं।
By:Dr Swati Gupta

3 Comments

  1. omendra.shukla omendra.shukla 06/05/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/05/2016
  3. C.M. Sharma babucm 06/05/2016

Leave a Reply