जीवन

जीवन

बेरूखी आँधियों में
वक्त के थपेड़ों ने
मुझे ये सिखाया है
आँखें मलते हुए चलते
छोटी-छोटी ठोक रों ने
मुझे इंसान बनाया है।
जीवन में खतरे की घंटी
न जाने किस ओर बजे
बाढ़ आये बह चले
तुफां आएं ये उड़े
ले जाकर धकेल दे
किसी गहरे नदी नाले में,
उसमें रहने वाली रेत में
किसी जगह पड़ी सीप ने
मुझे ये सिखाया है
आँखें मलते हुए चलते
छोटी-छोटी ठोक रों ने
मुझे इंसान बनाया है।
मोड़ बहुत से आये
हर मोड़ एक जैसा था
कहीं संभला कहीं गिर पड़ा
मुझे हवा ने उठाया
मोड़ पर पड़े गड्ढों ने
छोटे-मोटे पत्थरों ने
पांव के इन छालों ने
भाले जैसे इन कांटों ने
मुझे ये सिखाया है
आँखें मलते हुए चलते
छोटी-छोटी ठोक रों ने
मुझे इंसान बनाया है।

2 Comments

  1. babucm babucm 06/05/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 06/05/2016

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