बरसात की समाप्ति

बरसात की समाप्ति

आज उस काली घटा का
घमण्ड मानो है घटा
जो कभी आती थी उमड़-घुमडक़र
पानी मेघों पर चढ़ा ।
अब शुद्ध श्वेत पानी रहित
छोटी बड़ी कश्तियों की भंति
एक-दूसरे से बांधे डोर
ऊंचे शिखर में फ हराती लोर
आने लगे सुन्दर चित-चोर
रूई के फावे उठा।
आज उस काली घटा का
घमण्ड मानो है घटा।
नीले गहरे आसमान में
कटी-कटी छींटा कसी-सी
शुद्ध श्वेत मक्खन की
यौवन चढा आसमान पे
शौभा लगती जंगल की
बादलों पर खुमार है चढ़ा
आज उस काली घटा का
घमण्ड मानो है घटा ।

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  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 06/05/2016

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