बेवफाई का दर्द

? ?दर्द बेवफाई का??

वक्त बेवक्त तुम आगोश ए तसव्वुर में आया न करो।
तोड़ कर किसी का दिल अपना घर सजाया न करो।।

भ्रम है कि तुझे जमीं पर उतारा गया है चाँद बना के।
हुश्न एक जगमगाती शाम है, इस पर नाज खाया न करो।।

जिस हाल में भी हम थे, दौड़े आये तेरी एक पुकार पर।
जों न मिलना हो तो फिर मूझको यूँ ही बुलाया न करो।।

हम तड़पे है तेरे नूर ए दीदार से, कोई और न तड़पे।
अपना बहरूपिया चेहरा हर किसी को दिखाया न करो।।

कहते है, दिल से पुकारों तो कब्र के मुर्दे भी जी पड़ते है।
तुम तो फिर भी जिन्दा हो, यूँ बुत बन न जाया करो।।

बेरहम रहने दे, मत कोशिश कर मेरा दर्द समझने की।
दर्द की इन्तहा देख ली मैंने, अब और अजमाया न करो।।

सोया भी मै सोचकर काश ख्वाबों में ही तुम दिख जाओ।
यादों का बवंडर बन तुम मेरी नीदें चुराया न करो।।

“कुशक्षत्रप” बर्बाद हुवा एक मुक्कमल वफ़ा की चाह में।
यारो जवानी नायाब तौफा है रब का, हुश्न पर लुटाया न करो।।

✍सुरेन्द्र नाथ सिंह “कुशक्षत्रप”✍

10 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 06/05/2016
    • Ashutosh 08/05/2016
  2. babucm babucm 06/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 06/05/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 06/05/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 06/05/2016
  5. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 07/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 07/05/2016

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