पथिक तूं थक मत (३१ अगस्त २०१५)

पथिक तूं थक मत
कभी न तूं हारना
जिंदगी के सफर में
वक़्त को न काटना |

अगर वक़्त बुरा हो तो
उसमें भी मुस्कुराना
भले ही मुस्कुराकर
वक़्त को चिड़ाना |

जिस वक़्त ऐसा हो
अपने को सम्भालना
विस्वास के दम पर
वक़्त को पछाड़ना |

आत्मज्ञान के प्रकाश में
खुद को तूं चमकाना
अपने अगर साथ न दें
उसको भी तूं निभाना |

होशलों को संभालकर
अपनों को भी संभालना
अगर कोई गर्त में हो तो
उसको भी वहां से निकालना|

मजबूरियों का बहाना छोड़
कठिनाइयों से निकालना
खुद और दूसरों के लिए
ऐसा रास्ता निकालना |

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Kamlesh Sanjida

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/05/2016
  2. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 07/05/2016

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