शायरी2- तमन्नायें

तुम क्यों हुए शामिल मेरी तमन्नाओं में ज़ालिम,
तुम्हें तो ख्वाब के भी ख्वाब में कहीं गुम हो जाना था,
अगर अब भी कुछ शर्म-ओ-हया रह गयी हो दिल में,
तो कहा ये मान लो मेरा ‘जीयो और जीने दो ‘;

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  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/05/2016

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