आओ प्रिये

आओ प्रिये

आज की सांझ है कितनी प्यारी
नजरें तकती है राहें तुम्हारी
आ ही जाओ मेरी प्रियतमा
धरती ने बिछाई है हरियाली ।
मेघ बरसते हैं छम-छम
जो आग लगाते है तन में
ऐसी सुन्दर वाटिका खिली है
चारों तरफ महकी है फुलवारी ।
आ ही जाओ मेरी प्रियतमा
धरती ने बिछाई है हरियाली ।
तेरे आने से मेरी प्रियतमा
इन पर आयेगी और बहार
महक उठेंगे फि र से फू ल ये
खो चुके हैं सुगन्ध जो सारी ।
आ ही जाओ मेरी प्रियतमा
धरती ने बिछाई है हरियाली ।

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  1. योगेश कुमार'पवित्रम' 05/05/2016

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