गुमान बिकता है

✍गुमान बिकता है ✍

कैसे कहू आज प्रार्थना अजान बिकता है।
झूठे छलावे में हर बार इन्सान बिकता है।।

न्याय की उम्मीद अब किस चौखट से करें।
चन्द पैसों में गवाहों का ईमान बिकता है।।

जाति धर्म की भी लगने लगी है दुकाने यहाँ।
जहा देखों वहीँ मिट्टी का भगवान बिकता है।।

रसूख वाले ही है यहाँ पढ़े लिखे भिखमंगे।।
दहेज़ में दुल्हन का अरमान बिकता है।।

बाप मरता है बेटी की खुशिओं के लिए।
डोली खातिर गरीब का मकान बिकता है।।

भू माफियाओं के चंगुल में ख़त्म होती भूमि।
बंजर को छोड़ो यहाँ शमशान बिकता है।।

भ्रष्टाचारी इस कदर हावी है डाक्टरों पर।
गलत आपरेशन दवा में जान बिकता है।।

पढ़े लिखे का कद्र होता एक ढेले बराबर।
स्वर्ण से लदा गधे की शान बिकता है।

सूखे खेतों की मेढ़ों पर बैठा है जो उदास।
कुदरत की मार से वह किसान बिकता है।

बीचौलियो के बीच फसा अन्नदाता बेचारा।
औने पौने दामों पर गेहू धान बिकता है।

हुश्न देखकर जब मिलता पारितोषिक जहाँ।
बख्शीश में महफ़िल का कद्रदान बिकता है।

सद्गुण सदाचार कर्मयोग की बात पुरानी।
नेट पर आजकल यौन ज्ञान बिकता है।।

कुशक्षत्रप जब देखा आईने में अपना चेहरा।
पीछे खड़े होने में उसका गुमान बिकता है।।

✍सुरेन्द्र नाथ सिंह “कुशक्षत्रप”✍

15 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 05/05/2016
  2. babucm babucm 05/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 05/05/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 05/05/2016
  4. gayatri dwivedi 05/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 05/05/2016
  5. Nirdesh 05/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 05/05/2016
  6. Kajalsoni 05/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 05/05/2016
  7. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 06/05/2016
  8. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 06/05/2016

Leave a Reply