गंगा मैया

गंगा मैया

गंगा मैया को बुलाने में
भगीरथ का हाथ था
पृथ्वी पर न विनाश हो सके
इसमें शिव जी का साथ था

रोक कर अपनी जटाओं में
मैया के वेग को संभाला था
कुछ अनिष्ट न हो सके
इसलिए धीरे से उतारा था

प्रवाहित होकर हिमालय से
पूरे भारत को उबारा था
जड़ी – बूटियों का जहाँ संगम है
वहां से पथ बनाया था

भारत को गंगा मैया ने
एक असीम उपहार दिया था
अमर हैं वो जन ह्रदय में
भीष्म पितामह जिनका नाम था

भीष्म प्रतिज्ञा लेकर उन्होंने
जन जन को सन्देश दिया था
सामर्थ्य हो यदि तुममे
तभी लेना तुम भीष्म प्रतिज्ञा

ऐसा पुत्र दिया मैया ने
जो जन जन में प्रसिद्ध हुआ
बाड़ों की शैया पर लेटे
गंगा जल का प्रसाद लिया

गंगा मैया की महिमा है
जिसने जीवन को सार दिया
ये जल नहीं है अमृत है
ऐसा इसका नाम हुआ

ये अदभुत गंगा मैया हैं
इनका बड़ा उपकार हुआ
जन जन में जग प्रसिद्ध हैं
हम पर इनका आभार हुआ

देवेश दीक्षित
9582932268

One Response

  1. C.M. Sharma babucm 05/05/2016

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