कोई भी हमारा नही

इस जिंदगी को जिना अब तो हमे गवारा नही ,
किससे करे शिकवा गिला कोई भी हमारा नही ।

लाख तमन्ना थी इस दिल मे, जब से जीवन पाया,
पर हर कदम पर मैंने धोखा ही धोखा खाया ।
अकेले ही सह लेते है हर गम, अपना तो कोई सहारा नही ।
किससे करे शिकवा गिला कोई भी हमारा नही ।

न अपनी न उनकी खबर कोई लाता नही,
क्यू किया आखिर उसने ऐसा हमे सहा जाता नही ।
अब हर गम तो अपने है , उससे कहना तुम्हारा नही,
किससे करे शिकवा गिला कोई भी हमारा नही ।।

काजल सोनी

4 Comments

  1. babucm babucm 05/05/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 05/05/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/05/2016
  4. Kajalsoni 05/05/2016

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