गौ माता से रूबरू

गौ माता से रूबरू
हो गया निहाल
बह चले अश्रु
नयन हुए बेहाल

वो भी नयनों में नीर भरे
अविरल देख रही थी मुझको
ऐसा लगताथा जैसे
शिकायत कर रही थी मुझको

क्या मैं तुम्हारी माता नहीं
क्या मैंने तुम्हारा बिगाड़ा है
क्यों तुमको मुझसे प्यार नहीं
क्यों तुमने मुझे मारा है

ग्रंथों से मैं जुडी तुम्हारी
मेरा कोई पार नहीं
मोह माया से जुडी तुम्हारी
मुझको क्यों दुलार नहीं

जिगर से अपने लगाया तुमको
परिवार को तुम्हारे पाला है
अपना दूध पिलाया तुमको
तुमसे स्नेह लगाया है

मेरी ममता का तुमने
ये कैसा सिला दिया
मतलब था तब तक तुमने
मुझको मान दिया

कहाँ गया वो मान तुम्हारा
कहाँ गयी वो तुम्हारी भक्ति
जब दूध मेरा ख़त्म हुआ
तो बलि चढ़ा दी मेरी

है किसकातुमकोलालच
किसने तुम्हें भरमाया है
थी मैं तुम्हारे परिवार की पालक
क्योंमुझको कटवाया है

अगर ऐसा मैं जानती तुमको
नहीं उतरती पृथ्वी पर
कामधेनू हैं कहते मुझको
नहीं भटकती तुम्हारे दर

तुम अपनी माँ को भी
ऐसे ही बेचोगे
फिर भी वो दुआएं देगी
जब पीठ में खंजर घोंपोगे

ऐसे कपूत की नहीं जरूरत
क्यों ईस्वर ने तुम्हें बनाया है
कहती हूँ मैं कसम खा कर
व्यर्थ जीवन तुम्हारा है

धिक्कार है जीवन को तुम्हारे
जो तुमने हमें सताया है
अब भी न खुलीं अगर आँखें
ये जीवन व्यर्थ गंवाया है

क्या मुक्ति का है संविधान यही
जो विधि ने रचामेरे लिए
क्या परोपकार की परिडिती यही
क्यों विरोधाभास मेरे लिए

सुनकर माता की बातें
मन मेरा चीख उठा
उनकी करुण पुकार सुन के
मन मेरा पसीज उठा

कैसे हैं ये निर्दयी लोग
कहते शर्म मुझे आती है
इंसान नहीं हैं हैवान हैं लोग
देख कर इन्हें घिन आती है

ऐसे लोगों के कारण
गौ माता बड़ी चिंतित हैं
मन साफ़ अपना होने पर भी
पूरा समाज कलंकित है
गौ माता से रूबरू

देवेश दीक्षित
9582932268

2 Comments

  1. babucm babucm 05/05/2016
  2. babucm babucm 05/05/2016

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