वो अबोध

वो अबोध
पतले उसके हाथ पैर
बेजान सी उसकी काया
उम्र सात साल की
मासूमियत से भरी उसकी आँखे
आँखों में चंद सिक्के पाने की चाहत
उस चाहत के लिए
उसका ट्रेन की बोगियो में भटकना
कभी गाना कभी गुनगुनाना
कभी सरीर की कलाबाजी दिखाना
उसके बाद अपने छोटे हांथों को फैलाना
लड़ रहा है
अपनी किस्मत से
अपने पेट के लिए
माँ की दवाई के लिए
लड़ रहा है
अपनी किस्मत से
अपने बाप की दारु के लिए
वो अबोध
वो अबोध अभिषेक राजहंस

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  1. babucm babucm 05/05/2016

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