तुम्हारी चाहत मे

हम तुम्हारी चाहत मे अक्सर
मौसम की तरह बदलते है ।
कभी दिवाने से लगते है,
कभी पागल बन कर फिरते है ।।
तुम दुर नही पास लगती हो ,
ख्यालो मे जो रहती हो ।
रुख तुमने हमसे मोड़ा है ,
पर हम जिक्र तुम्हारा करते है ।
आशियाना तुम्हारा दुर भला,
दिल मे ही हम तुम्हे रखते है।
सूनी सुनी गलियो मे चल कर ,
हम राह तुम्हारी तखते है ।
आईनो मे देखा करते है,
और सपनो मे मिला करते है।
हम तुम्हारी चाहत मे अक्सर ,
मौसम की तरह बदलते है ।।

” काजल सोनी ”

3 Comments

  1. babucm babucm 04/05/2016
  2. Kajalsoni 04/05/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 04/05/2016

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