तुम हो पर तुम नही

अजीब इत्तेफाक है तुम हो पर तुम नही
अजीब इत्तेफाक है हम भी गर्दिशे गम नही

व्यान हो रहीं है गुफ्तगु तेरी मेरी आज भी
अर्जदार एक-दूजे के हम नही, तुम नही

दो पल देखकर अब न नजरे दोहराईऐ
वो जो तू था वो जो मै था वो अब हम नही

ये मोड़ कई रात तक मेरा पीछा न छोड़ेगा
कि तेरी नजरो का असर अब भी कम नही

5 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 02/05/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/05/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/05/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 02/05/2016
  5. Nirdesh 03/05/2016

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