दिव्य आलोक

?दिव्य आलोक ?

दिव्य आलोक मय
ये सुनहली रश्मियाँ
प्रभात की शुभ वेला में
प्रस्फुटित होते पल्लवों पर
जगा रही हैं प्रत्युष मनोहर
खिल रहे हैं पुष्प चहुँऔर
हो रहा हैं आलोक
मगर ………
उनका क्या
जिनके जीवन से
मिटा नहीं अभी तक डर
भूख – प्यास मिटाने का।।

वो गुमसुम उदास चेहरे
कब होंगे आलोकित
कब उनके घरों में
होगा ख़ुशियों का दिव्य आलोक
यक़ीनन जल्द ही
बहुत जल्द ही ………
बस यही एक विश्वास
अब तक बँधा हुआ हैं।

??अनमोल??

7 Comments

  1. Anmol tiwari Anmol tiwari 02/05/2016
  2. C.M. Sharma babucm 02/05/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/05/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/05/2016
  5. Anmol tiwari Anmol tiwari 07/05/2016
  6. Anmol tiwari Anmol tiwari 07/05/2016
  7. Anmol tiwari Anmol tiwari 07/05/2016

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