पत्थर के बूत

बहुत करते थे ना तुम
मुझको भर बाँहो में प्यार
और खूब लाते थे तुम
मेरे लिए उपहार
था बहुत गुमां तुम्हें
मेरे प्यारे हुस्न पर
तो फिर अब क्या
क्यों नहीं दिखाते अपनापन
क्यों बन गये हो तुम
यूँ पत्थर की बूत

बस इसीलिए ना
कि __
अब मेरे हुस्न पर
लग गये हैं तेजाब के दाग़
हो गया चेहरा बदसूरत
मगर सुन____
क्या यहीं हैं तुम्हारा प्यारा

अरे ओ ! बेवफा
अब नहीं दिखाऊँगी मैं
ये बदसूरत अपनी
मगर जाते जाते सुन
कहूँगी इतना ज़रूर
मत करना बदनाम कभी
यूँ किसी की मोहब्बत को
क्योंकि मोहब्बत तो
होती हैं जरिया जीने की
मगर तुम समझोगे कैसे
आख़िर तुम तो
बने हुए हो पत्थर के बूत

??अनमोल??

8 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/05/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/05/2016
  3. Anmol tiwari Anmol tiwari 02/05/2016
  4. Anmol tiwari Anmol tiwari 02/05/2016
  5. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 02/05/2016
  6. babucm babucm 02/05/2016
  7. Anmol tiwari Anmol tiwari 07/05/2016
  8. Anmol tiwari Anmol tiwari 07/05/2016

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