उलझन

एक नयन नीली,
एक आँचल गीली,
एक होठ रसीली,
एक कंठो की पीड़ा,
पर बेहद सुरीली ।

एक निर्झर ऊँची,
चट्टानों को छूती,
है बहती जाती
एक मोह में अटकी,
वापसी को तरसी,
पर राह भूली-बिसरी।।

एक नभ है छितरी,
मेघो को बुनती,
जो पल-पल बनती,
जो पल-पल मिटती,
सुख-दुख में लिपटी,
सुख-दुख को रचती ।

एक साँझ है धुँधली,
जाने को आतुर,
एक रात है गहरी,
आने को व्याकुल,
एक दिन है फैला,
सफेद उजाला,
पर थोड़ा मैला।।

एक मन है उलझा,
उलझन न खुलता,
धुँध छाता जाता,
पग बढ़ता जाता,
मन डर-डर घबराता ।

अलका

15 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/05/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 01/05/2016
  2. Jay Kumar 01/05/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 01/05/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 01/05/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 01/05/2016
  4. Archana mehta 01/05/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 01/05/2016
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/05/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 01/05/2016
  6. C.M. Sharma babucm 02/05/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 02/05/2016
  7. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 02/05/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 02/05/2016
  8. आभा आभा 15/05/2016

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