गोधरा सा ग़दर होगा हर इक शहर

एक चेतावनी भरा गीत जेहादी मोमीनों को —-

रचनाकार – कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग”
whatsapp- 9675426080

“गोधरा सा ग़दर होगा हर इक शहर”

भक्त की भावना से खेलो सुनो
फिर से सड़कों पे जिस दिन उतर जाएँगे
गोधरा सा ग़दर होगा हर इक शहर
पर जिहादी के बढ़ते कुतर जाएँगे
हूर की चाहतों में जो — हुए
फिर वो जन्नत में सारे सूअर जाएँगे
खाक में ही मिलेंगे ये सारे बदन
या तो बिगड़े ये मोमिन सुधर जाएँगे

पाप इनके भुलाते रहे अब तलक
माफ करते रहे हम हर इक भूल को
इनको हमने दिये भेंट में गुल सदा
ये तो हरदम ही बोते रहे शूल को
अब जो गुस्ताखी कोई भी फिर से हुई
माफ़ी वाली ना हम भूल कर पाएँगे
गोधरा सा ग़दर होगा ——————-

ईद, बकरीद हो या हो रोजा कोई,
पाक रमजान हो या शबेरात हो
पर्व अपने मनाओ ये तुम चैन से
ताजिया हो, खुशी, ग़म का जज्बात हो
हाँ अगर होली, दीवाली या शौर्य के
पर्वों पर भरते बिष ये नज़र आएँगे
गोधरा सा ग़दर होगा ———————

अब तो हद हो चुकी हर सितम-जुल्म की
मान मंदिर का भी भंग होने लगा
दोष भगवा पे कितने लगे बेवजह
ध्वज सनातन का भी रंग खोने लगा
हाँ भरोसा मगर जिन वजीरों पे है
अपने वादों से गर वो मुकर जाएँगे
गोधरा सा ग़दर होगा ——————–

आओ मिलकर सभी अब जवानी लड़े,
राम जी की वो पावन कहानी पढ़े
प्रज्ञा, दारा से निर्दोषों को कर रिहा
मान मर्यादा की इक निशानी गढ़े
“आग” कहता है बाबर जो फिर से अगर
मंदिरों पे ढहाने कहर आएँगे
गोधरा सा ग़दर होगा ———————