Inspirable Poem by Rina Baghele

” रफ़्तार ”

रफ़्तार ही रफ़्तार ले। रफ़्तार से रफ़्तार ले।
न चल यहाँ न चल वहाँ बस रफ़्तार से बढ़ वहाँ।

न याद हो न बात हो बस भविष्य का की ताज हो।
भविष्य के साज से हो रुखा तो भूत भी ख़ाक हो।
रफ़्तार ही रफ्तार ले रफ़्तार से रफ़्तार ले।।

न मौन हो न शोक हो बस वक्त का ही भान हो।
वक्त के ताज से हो रूखा तो नाज़ भी ख़ाक हो।
रफ़्तार ही रफ्तार ले रफ़्तार से रफ़्तार ले।।

न थम हो न भ्रम हो बस मन का ही संग हो।
दिल के राज से हो जला तो सोच भी खाक हो।
रफ़्तार ही रफ्तार ले रफ़्तार से रफ़्तार ले।।

न रोक हो न टोक हो बस एक ही स्ट्रोक हो।
कल के ख्वाब पे हो न हो मिटे तो हम भी खाक हो।
रफ़्तार ही रफ्तार ले रफ़्तार से रफ़्तार ले।।

रफ़्तार ही रफ़्तार ले। रफ़्तार से रफ़्तार ले।
न चल यहाँ न चल वहाँ बस रफ़्तार से बढ़ वहाँ।
———-रीना रूपसेन बघेले————

Leave a Reply