तेरी एक मुस्कान

तेरी एक मुस्कान ज़िंदगी बन गई
ना जाने कब ये मेरी हमसफ़र बन गई
कुछ तो है बात वो मेरी नजर चुरा ले गई
ना चाहते हुये भी ये जिंदगी तेरी गुलाम बन गई

तुम ही बस मेरे लिये खुदा की बंदगी बन गई
तेरी वो मुस्कान, मेरा अरमान,आरज़ू ..हमकदम बन गई
इन दिनों कुछ सितम ये हुआ …
ना चाहते हुये भी वो मुस्कान कही मुझसे दूर हो गई
क्या उसूल है ये जिंदगी तेरा
कमबख्त इश्क़ का गुलाम कर गई

वो मुस्कान गुमनाम हो गई …
चाहते हजार मेरी न करू तुझसे कभी ऐतबार ..
लेकिन ना चाहते हुये भी
कमबख्त दिल करता बातें हजार …
जाने क्या इस दिल से बात निकल गई …
तू ही वही मुस्कान ..
जिसके लिये मोहब्बत मेरी निसार कर गई …

मान लिया फरमान खुदा का …
तेरी वो मुस्कान मेरा अरमान बन गई …
तेरी मुस्कान मेरी जिंदगी बन गई …
बस एक तेरी वो मुस्कान ….

– मयूर सिंधा
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