कैदखाना

भूल जाने की कसमें हैं,फिर मिलने का बहाना है,
ये तेरा दिल है जानेमन,या कोई कैदखाना है;
कि ऐसे मूँद रखा है,तूने आगोश में अपने,
ना मेरी नींद आँखों में,अगर है तो तेरे सपने,
वो तेरी रोज रूसवाई ,मेरा हंसकर मनाना है,
ये तेरा दिल है जानेमन,या कोई कैदखाना है;
वो मेरा पूछना तुझसे,कैसा बंधन अनजाना है,
तेरा हंसकर के कहना कि,ये उल्फ़त का फँसाना है,
यक़ीनन ‘कैदखाना’ है,यक़ीनन कैदखाना है
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रणदीप चौधरी (भरतपुरिया)

10 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/04/2016
  2. Randeep Choudhary रणदीप चौधरी 29/04/2016
  3. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 30/04/2016
    • Randeep Choudhary Randeep Choudhary 30/04/2016
  4. babucm babucm 30/04/2016
    • Randeep Choudhary Randeep Choudhary 30/04/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/04/2016
    • Randeep Choudhary Randeep Choudhary 01/05/2016
  6. Archana mehta 01/05/2016
    • Randeep Choudhary रणदीप चौधरी 01/05/2016

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