वतन

आज जाने क्यूं ऐसा लगता है की जिन्दगी थमी है।
कुछ रोज ऐसे थे जब समय मिलता नहीं था
आज ऐसा है की वो कटता नहीं है।
कुछ प्यासे हैं तो कुछ लबालब
पाने की हसरत अब यहाँ नहीं है
आ जाता कहीं किसी किनारे
दरिया नहीं यहाँ अपनों की कमी है।
सुभ

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