रूह…….

तुम आजकल कुछ ज्यादा ही याद आने लगे हो
यादो के संग-संग खवाबो में भी सताने लगे हो
इस तरह से मोहब्ब्त में सताना अच्छी बात नहीं
सुना है आजकल रूह बन जिस्म में समाने लगे हो

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डी. के. निवातियाँ ______@

12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/05/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/05/2016
  2. C.M. Sharma babucm 02/05/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/05/2016
  3. shivdutt 02/05/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/05/2016
  4. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 02/05/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/05/2016
  5. sarvajit singh sarvajit singh 02/05/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/05/2016
  6. Archana mehta 04/05/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/05/2016

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