घमंड

पैसो से सब खरीद लोगो तुम l
क्या अपनी सांसे खरीद पाओंगे ?
फिर क्यों है घमंड इन पैसो का ?
जब सब कुछ यही छोड़ जाओंगे ll

क्यों करते हो इस रूप पर घमंड ?
ये रूप एक दिन यू ही ढल जाएगा l
सवारना है तो अपने मन को सवारों l
सच्चा मन ही तुम्हे सुंदर बनाएगा ll

क्यों करते हो अपनी भक्ति पर घमंड ?
दिया जलाने से सब भक्त नहीं बन जाते l
ईश्वर तो स्वयं उसके भक्त बन जाते है l
जो निरस्वार्थ दूसरों की सेवा करते जाते ll

मत कर अपनी किस्मत पर घमंड l
किस्मत पल भर में बदल जाती है l
समय कभी एक सा नहीं रहता l
आज तेरी तो कल मेरी बारी है ll

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3 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/04/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/04/2016
  3. C.M. Sharma babucm 27/04/2016

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