गुलशन सा आशियाना………..ग़ज़ल ………….(डी. के. निवातियाँ )

नफरत की दलदल फैली है शहर में कहीं तबाह ना हो जाये
संभल कर उठाना कदम के पाक दामन दागदार ना हो जाये !!

बढ़ी शिद्दतो से सजाया है वालिदो ने इस अहले चमन को,
आबरू तेरे हाथ है इसकी अब कही बे-समादर ना हो जाये !!

जाने किस रुख से उठकर आया है ये जलजला-ऐ-तबाही का
बचाये रखना हौसला ऐ जान, टूट कर तार-तार ना हो जाये !!

दहशत गर्दी के आलम में हर तरफ बिखरा मंजर ऐ खौफ है
फिक्रमंद रहना के गुलशन सा आशियाना बेकार ना हो जाये !!

देता है नसीहत “धर्म” के संभाले रखना इस बागवान को
किस्मत से मिली जन्नत, दोजख का द्वार ना हो जाये !!

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डी. के. निवातियाँ ___________@

16 Comments

  1. babucm babucm 28/04/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 28/04/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/04/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 28/04/2016
  3. sarvajit singh sarvajit singh 28/04/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 28/04/2016
  4. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 28/04/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/04/2016
  5. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 29/04/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/04/2016
  6. BARGLA BARGLA 29/04/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/04/2016
  7. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 01/05/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/05/2016
  8. Er Anand Sagar Pandey 05/08/2016
  9. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/08/2016

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