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हमारी नदियों की दुर्दशा पर ..

किसी की आँख में आंसू किसी का जख्म रिसता है
यहाँ अट्टाहसों की गोद में भी दर्द पलता है
जिसे देखो वही आतुर नदी की धार से मिलने
मुझे इस धार के भी बीच रेगिस्तान दिखता है
गुजारिश है मेरी सबसे मेरी नज़रों से तुम देखो
गरल भर जाये न उसमें जहाँ अमृत छलकता है

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/04/2016

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