प्रेम

दूर-दूर खामोशी है
जिसमें छिपी,
एक चुपी तेरी
एक चुपी मेरी
गहरी है ।

बंद तेरे जो लब हैं
सिले मेरे भी अधर हैं,
पर दोनों के नैना हारे हैं,
छिपे प्रेम,
पलको से नित
जो झड़े हैं ।।

आज खामोशी जीती है
लफ्ज़ो की भूमिका
सिमटी है।

हम दोनों का अहं
आज है टूटा,
एक हुआ है साथ
जो जाने
कब से था रूठा ।।

आज तेरे -मेरे दामन के
छिपे भाव भी हारे हैं,
ह्रदय की कड़वाहट को
हमने ह्रदय में हीं मारे है,
अटल,अमिट,अमलिन
है हमारा प्रेम,
देखो कह रहे,
व्योम के सारे
तारें हैं ।

अलका

12 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 26/04/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 26/04/2016
  2. Jay Kumar 26/04/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 26/04/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/04/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 27/04/2016
  4. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 27/04/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 27/04/2016
  5. anuj tiwari 27/04/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 27/04/2016
  6. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/04/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 27/04/2016

Leave a Reply