गज़ल –: सारे शहर में जुल्म है !

गज़ल –: सारे शहर में जुल्म है !

ग़ज़लकार –: अनुज “इंदवार”

सारे शहर में जुल्म है आक्रोश है !
पर यहाँ क्यों आज तू खामोश है !!

जुल्म को सहना भी एक जुल्म है !
क्यों समझता है कि तू निर्दोष है !!

बस्तियां सारी वहाँ की जल रहीं !
बिल में दुबका तू जहाँ खरगोश है !!

छिन गये है निवाले , पर तुझे क्या ?
यहाँ दाल-रोटी में तुझे संतोष हैं !!

ठोकरों से डर गया इंसाफ अब !
बेईमान का चारो तरफ़ जयघोष है !!

10 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/04/2016
    • anuj tiwari 26/04/2016
  2. C.M. Sharma babucm 26/04/2016
  3. Hitesh Kumar Sharma Hitesh Kumar Sharma 26/04/2016
  4. Rachana sharma rachana 26/04/2016
  5. sarvajit singh sarvajit singh 26/04/2016
    • anuj tiwari 26/04/2016
  6. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 27/04/2016
  7. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 27/04/2016
    • anuj tiwari 27/04/2016

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