पहचान …..


जैसे लाखो सितारो के मध्य चाँद कि पहचान अलग होती है ।
गुलशन मे खिलते फूलो मे गुलाब कि सुगंध अलग होती है ।
लाख छुपा लो दिल के अरमान मासूमियत के नकाब से ।
चाहत भरी नजरो के चेहरे कि मुस्कान हमेशा अलग होती है… ।।


डी.के. निवातियॉ__________@

12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/04/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/04/2016
  2. ALKA प्रियंका 'अलका' 29/04/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/04/2016
  3. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 29/04/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/04/2016
  4. sarvajit singh sarvajit singh 29/04/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/04/2016
  5. babucm babucm 29/04/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/04/2016
  6. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 01/05/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/05/2016

Leave a Reply