लोकतंत्र का अपंग स्तम्भ

हुआ है अपंग लोकतंत्र का स्तम्भ चौथा
नित-नित झाकियां दिखाता है बवाल की
वेमुला, प्रत्यूषा पर तो मचा है हाहाकार
आत्महत्या गुम हुई गभरू गौपाल की
आज शक्तिमान जो हुआ है शक्तिहीन लाखों
फौजें आके रोयीं आँसुओं के घड़ियाल की
कत्लखानों में तो कटती हैं लाखों गायें रोज़
फिक्र नही दोगलो को गौमाता के हाल की

कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग”
9675426080

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2 Comments

  1. अरुण अग्रवाल अरुण जी अग्रवाल 29/04/2016
  2. ROHIT SINGH RUSTAM 14/06/2016

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